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Friday, 11 January 2019

India vs Australia: Virat Kohli Talks About existence After Retirement

Virat Kohli, arguably the best batsman in all three formats of the game, is at the top of his recreation at the moment. The 30-year-old is fit as a fiddle and breaks records for fun. nevertheless, there will come a day when India's run computing device will make a decision to bid adieu to cricket. Responding to a question for the duration of his press conference forward of India's first one-day global (ODI) towards Australia, Kohli made it clear that he's going to no longer play in any Twenty20 leagues after his retirement. "I will be spent, the day I finish I will probably be entirely spent and that is the reason i am going to stop playing cricket. So i don't see myself coming back and enjoying once more. as soon as i'm performed, I will likely be carried out, and i is not going to be seen around the scene," Kohli mentioned on Friday.

"seem I do not know whether or not that stance goes to change in the future. so far as i am involved, enjoying extra cricket when i'm done, i do not consider i am in that zone to be sincere," Kohli brought.

Retired cricketers like AB de Villiers and Brendon McCullum still proceed to play in T20 leagues world wide but Kohli says he will not become a member of them.

"i've played sufficient cricket within the final five years and i are not able to remark on even the first thing I do once I retire given that i do not feel like i'm going to select up the bat once more," he stated.

On Friday, Kohli also distanced his crew from controversial comments made by using all-rounder Hardik Pandya on a television chat show that sparked social media outrage.

"We as the Indian cricket group and in charge cricketers do not align with those views, those have been person opinions. we're nonetheless ready for a selection to be made," Kohli mentioned.

"From the Indian cricket group's point of view, this changes nothing in our beliefs within the alternate room, it does nothing to the spirit we now have have been in a position to create. combinations will need to be thought of as soon as the determination comes out," Kohli introduced.

After becoming the primary Indian captain to win a test series in Australia, Kohli will now lead his workforce within the three-in shape ODI sequence opening in Sydney on Saturday.
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Wednesday, 14 November 2018

देश के 91 प्रमुख जलाशयों का जलस्तर 67 प्रतिशत के समान स्तर पर रहा

08 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 107.883 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल संग्रह हुआ। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 67 प्रतिशत है। 01 नवंबर, 2018 को समाप्‍त सप्ताह में जल संग्रह समान स्तर पर था। 08 नवंबर, 2018 को समाप्त सप्ताह में यह संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 102 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 98  प्रतिशत है।
इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 257.812 बीसीएम का लगभग 63 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ पनबिजली लाभ देते हैं।
क्षेत्रवार संग्रहण स्थिति : -
उत्तरी क्षेत्र
उत्तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 15.35 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 85 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 71 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 74 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
पूर्वी क्षेत्र
पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 13.22 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 70 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 79 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 74 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
पश्चिमी क्षेत्र
पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 31.26 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 16.52 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 53 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 69 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 66 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
मध्य क्षेत्र
मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 31.47 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 74 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 57 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 68 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।
दक्षिणी क्षेत्र
दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्ध संग्रहण 31.33 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 61 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्थिति 64 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 65 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए संग्रहण से कम है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कम है।
पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बेहतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्‍थान, उत्तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कम है उनमें झारखंड, ओडिशा पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, गुजरात और महाराष्‍ट्र, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं।